नियमावली-1
संगठन, कार्यप्रणाली और दायित्व
राष्ट्रीय सू्क्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (निम्समे)
(सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का संगठन, भारत सरकार)
युसुफगुडा, हैदराबाद 500 045, भारत
दूरभाष- + 91-40-23608544-46 + 91-40-23608316-19
फैक्सः + 91-40-23608547 + 91-40-23608956
ई मेलः webmaster@nimsme.org
Website: www.nimsme.org

मूल

भारत सरकार ने तीसरी पंचवर्षीय योजना के कार्यकारी समूह की सिफारिश पर लघु उद्योगों के लिए एक संस्थान की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। तद्नुसार केन्द्र सरकार ने अक्तूबर 1960 में दिल्ली में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक विभाग के रूप में केन्द्रीय उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान शुरू किया। इसका मूल उद्देश्य केन्द्रीय लघु उद्योग संगठन के साथ-साथ राज्य सरकार के उद्योग विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण मुहैया करवाना था।

संस्था में परिवर्तन

वर्ष 1962 में भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 30 जुलाई, 1962 को संशोधन संख्या 27-एसएसआई (सी) (6)/62 का अनुसरण करते हुए सीआईईटीआई को हैदराबाद स्थानांतरित किया और इसे हैदराबाद सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम संख्या 1350 के 1 फासली के अधीन स्वायत्त संस्था के रूप में परिवर्तित कर इसका नाम लघु उद्योग विस्तारण प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद रखा गया। केन्द्रीय औद्योगिक विस्तारण प्रशिक्षण संस्थान के सारे कार्य 1 जुलाई, 1962 के पूर्वाह्न से लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान ने लिये और केन्द्रीय औद्योगिक विस्तार प्रशिक्षण संस्थान के रूप में शुरू किये गये सरकारी विभाग का कार्य 30 जून, 1962 के अपराह्न से समाप्त हो गया।

11 अप्रैल, 2007 को इस संस्थान का नाम परिवर्तित कर राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्से) रखा गया।

संस्था के उद्देश्य

संस्था के उद्देश्य इस प्रकार हैं -

1. लघु उद्योग विकास और प्रबंधन गतिविधियों में संलग्न व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण मुहैया करना, उनका पर्यवेक्षण करना तथा उनके लिए प्रशिक्षण की योजना तैयार करना।
2. लघु उद्योगों के विकास से संबंधित कार्यक्रमों अथवा अनुसंधान कार्यक्रमों को अंजाम देना अथवा उनका प्रायोजन करना, और
3. लघु उद्योग के विकास के लिए सेवाओं के प्रावधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय अथवा अन्य संगठनों के साथ कार्यकारी तकनीकी सहायता, समझौतों को अंजाम देना।

संस्थान के नाम में परिवर्तन

भारत सरकार ने लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईटी) का नाम 28.09.1984 में राष्ट्रीय लघु उद्योग विस्तारण प्रशिक्षण संस्थान (निसिएट) के रूप में परिवर्तित कर दिया और बाद में फिर 11.04.2007 को फिर इसे परिवर्तित कर राष्ट्रीय सू्क्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्से) रख दिया।

दृष्टिकोण

♦ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सृजन और उनके संवर्धन एवं विकास के लिए उत्कृष्टता के वैश्विक केन्द्र के रूप में उभरना।
संस्थान के उद्देश्यों की तालिका को दो शीर्षकों में निम्नलिखित रूप से सम्मिलित किया गया हैः
♦ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने तथा उसके लिए सहयोग प्रदान करने वाले मंच के रूप में निम्समे।
औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहित करना, उनका विकास करना तथा उनका आधुनिकीकरण करना।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास के लिए प्रौद्योगिकियों तथा पहुँच के संबंध में ज्ञान का प्रचार।
मानव संसाधन और संगठन विकास,
1. उद्यमिता विकास
2. प्रबंधकीय कौशलों का विकास
3. तकनीकी कौशलों का विकास
4. विपणन कौशलों का विकास
5. नियोजित हस्तक्षेप परिवर्तन
6. संगठनात्मक विकास आदि
  औद्योगिक विकास की नीतियाँ तैयार करने के साथ ही नीतियों का प्रसार, कार्यान्वयन और उनकी समीक्षा करना।
  औद्योगिक समझौतों को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग संघों के साथ परिचर्चा करना और चैम्बर ऑफ कॉमर्स, विकास संगठनों एवं सरकारी विभागों के साथ नये सम्पर्क बनाना।
  भारत और अन्य विकासशील देशों में सूलम उद्यमों की आवश्यकतानुसार उत्कर्ष केन्द्र के तौर पर कार्य करना और औद्योगिक विकास में शोध प्रॉजेक्टों को हाथ में लेना
  एमएसई क्षेत्र के कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखना। लघु व्यापार प्रबंधन से संबंधित प्रमाणपत्र एवं डिग्री पाठ्यक्रमों की गतिविधियों का विस्तार करना।
  सूलम उद्यमों के साथ प्रणालीगत सहयोग करते हुए उनके अधिकारियों के लिए प्रशिक्षुयों के प्रशिक्षु बनकर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाना।
  निम्से संकाय को विभिन्न राज्यों में तैनात कर राज्य समन्वयक प्रकोष्ठ के विभिन्न संगठनों के साथ सम्पर्क स्थापित करना।
  उद्योग से संबंधित राष्ट्रीय अधिवेशन और सम्मेलन करना
  अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाएं चलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ समन्वय करना।
  औद्योगिक नेटवर्क को स्थापित करने के लिए प्रकाशन के माध्यम से औद्योगिक सूचनाएं एकत्र कर उसे सभी जगह प्रसारित करना।
सूलम उद्यमों की समेकित सेवा प्रदाता के रूप में निम्से

सूलम उद्यमों की औद्योगिक सूचना सेवा से संबंधित

• नये अवसर
• नये उत्पाद और सेवाएं
• निवेश की संभावनाएं
• नयी प्रौद्योगिकी
• उत्पादों का विपणन और सेवा
• समझौता, सहयोग, अधिग्रहण और विलय आदि
• सृजनात्मक एवं नये विचार आदि

सामान्य तौर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना तथा सूलम उद्यमों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर खास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अंजाम देना।

• उद्योग विशेष कार्यक्रम
• कम्पनी विशेष कार्यक्रम
• उत्पाद विशेष कार्यक्रम
• कम्पनी भीतर कार्यक्रम/परिसर बाह्य कार्यक्रम
• निम्से आदि में आवासीय कार्यक्रम

 

सूलम उद्यमों के लिए परामर्श सेवाएं
• परियोजना तैयार करना / उत्पादों का विवरण
• साध्यता रपोर्टों की तैयारी
• टर्न की परियोजनाएँ
• हस्तांतरण सहायता एवं प्रौद्योगिकी उन्नतिकरण
• उत्पाद विविधता
• स्थानीय और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच स्थापना
• नये उपक्रमों के लिए पूंजी का प्रावधान
• सूलम उद्यमों को सक्रिय पूंजी जुटाने के लिए सहायता और जारी परियोजनाओं के लिए सावधि ऋण मुहैया करवाने के लिए सहायता
• राज्य सरकारों के सहयोग से सूलम उद्यमों को औद्योगिक संपत्तियों, आधारभूत संरचना तथा प्रौद्योगिकी पार्क, कौशल विकास केन्द्र, विपणन विकास केन्द्र आदि के विकास के लिए सहायता
• प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सूलम उद्यमों को राज्य सरकार के साथ सहयोग प्रदान करना
  निम्से की अनुसंधान सुविधाओं तथा निधि आधारित अनुसंधान परियोजनाओं को शुरू करना।

अभियान

• सूलम उद्यमों को नीति, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी, सूचना, शिक्षा, प्रबंधन और विस्तार के माध्यम से सहायता कर विकास को बढ़ावा देना।

विकास की ओर अग्रसर

संस्थान गत कई वर्षों से उद्यमिता, विकास, तकनीकी, प्रबंधन, विस्तारीकरण और सूचना सेवा के क्षेत्रों में गहन अनुभव प्राप्त कर चुका है। लघु उद्योगों की उन्नति में उच्च स्तर के संसाधन उपलब्ध करवाने में निम्से अद्भुत क्षमता हासिल कर चुका है। अपने आरंभ से ही निम्से लघु और मध्यम उद्योगों को लगातार सहयोग प्रदान करता आ रहा है और उद्यमियों को अनुसंधान, परामर्श, सूचना, प्रशिक्षण तथा विस्तार जैसी सेवाओं के सर्वोत्तम माध्यम उपलब्ध करवाकर उद्यमियों को विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वर्तमान में ज्ञान आधारित और अस्थिर अर्थव्यवस्था के दौर में लघु तथा मध्यम उद्यमों के सामने बड़ी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसके साथ ही वैश्विकरण के कारण सूलम उद्यमों के सीमित साधनों से प्रतिस्पर्धा करना काफी कठिन हो गया है। अर्थव्यवस्था और बदलती नीतियों को ध्यान में रखते हुए निम्से आवश्यकता के आधार पर कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, संम्मेलनों का आयोजन करता है। इन सभी गतिविधियों का प्राथमिक उद्देश्य प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से उद्यमों को सफल बनाना रहा है। वर्तमान के वैश्विकरण के दौर में निम्से के कार्यक्रम सर्वभौम आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किये जाते हैं। इन विशेष कार्यक्रमों के प्रशिक्षण से उद्यमियों चुनौतियों का सामना करने में काफी सफल हुए हैं, इनसे उद्यमियों को प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिली है और विश्व स्तर की प्रतिस्पर्धा में बनने से उनको बहुत लाभ पहुँचा है। निम्से ने भौगोलिक सीमाओं को पार कर कई अन्य विकासशील एवं विकसित देशों में अपने अनुभवों और सेवाओं को विस्तारित किया है। निम्से ने सीएफटीसी (कॉमन वेल्थ फंड फॉर टेक्निकल कोऑपरेशन), यूनि़डो (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संस्थान), यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शिक्षण, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन), यूएनडीपी (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम), दि फोर्ड फाउंडेशन-यूएसए, जर्मनी की जीटीजेड, यूसेड ( संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी), आईएलो (अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन) जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सियों के साथ लाभप्रद परिचर्चाएं की हैं।

श्रेष्ठता की उपलब्धियाँ

 पहली बार उद्यमिता प्रारूप के विकास के लिए अध्ययन में अग्रणी –पी.आर. डेविड मैक-क्लेलैंड्स, काकिनाडा अनुभव (1964)
देश में पहली बार युवा अभियंताओं और टेक्नोक्रेटों के लिए कार्यक्रम (1970)
सूलम उद्यमों के बारे में देश में पहला अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम (1967)
लघु उद्यम राष्ट्रीय प्रलेखन केन्द्र जैसे अनोखे केन्द्र की देश में स्थापना (1970)
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए लघु उद्योग विकास पर अभिविन्यास (1986-89)
विकास केन्द्रों पर पहला अध्ययन (1973)
देश में पहली बार उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सतत विकास के लिए क्षेत्रीय केन्द्रीय शाखा की स्थापना (1979)
देश में उद्यम उन्नति के लिए क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम आरंभ (1971) उडीसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश में उद्यमियों के लिए विज्ञान एवं तकनीकी पर केस स्टडीस और वीडियो डाक्यूमेंट्री बनाई गई (1986)
>लघु उद्योगों के विभिन्न पहलुओं पर नीति अनुसंधान अध्ययन(1986, 1989, 1992, 1997)
हैदराबाद विश्वविद्यालय ने निम्से को लघु उद्योग विकास में अग्रिम अध्ययन तथा अनुसंधान केन्द्र के तौर पर पहचान दी(1991)
छद्मवेशी क्रियाकलापों के बारे में इनके लिए कम्प्यूटरीकृत सॉफ्टवेयर विकसित किया गया -
• लघु उद्योग प्रबंधन (सिम सिम-1987)
• प्रॉजेक्ट का मूल्यांकन और आकलन (केप-1996)
• मुख्य मंत्री रोज़गार योजना (सीएमईवाई) का शीघ्र मूल्यांकन (2000)
  कुछ राज्यों में समेकित औद्योगिक विकास केन्द्र (आईआईसी) की प्रगति के बारे में तथा नई दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के आयोजन के बारे में वीडियो फिल्में तैयार की
(1995)
  यूनेस्को की अध्यक्षता (1997)
  आंध्र प्रदेश-आईएलओपरियोजना के अंतर्गत चयनित जिलों में बालश्रम से संबद्ध परिवारों को आय के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (2001) की ओर से लिटिल एंजेल परियोजना चलायी गई (2002-03)
  श्रीलंका के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए उद्यमी विकास और प्रभावी कार्यक्रम (एज) के अंतर्गत लघु उद्यमी उत्कृष्टता निर्देशिका का निर्माण (1995)
  निर्यात उत्पाद ग्राम
(1999)
  नामिबिया, दक्षिण अफ्रिका, भूटान (2000), नाइजीरिया (2001), सूडान, कैमरुन, घाना(2002)के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खरीदार से खरीदार (बी2बी) विनिमय व्यवस्था।
राज्यों और केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के स्वेच्छा से सेवानिवृत्त/ चयनित कर्मचारियों के लिए उद्यमी विकास कार्यक्रम (ईडीपी) का आयोजन
(2001 से)
  भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से कर्मचारी सहायता प्रकोष्ठ (ईएसी) को केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम अंडरटेकिंग (सीपीएसयू) के चयनित कर्मचारियों के प्रशिक्षण और पुनर्वास हेतु इसे नोडल एजेन्सी के तौर पर मान्यता प्रदान की । (2002)
  आवर्ती व्यय में आत्मनिर्भरता हासिल (2001-2002)

आत्मनिर्भरता

वर्ष 2000-01 तक निम्से आवर्ती (राजस्व) व्यय के बारे में पूर्ण रूप से तथा भारत सरकार की निधि पर आंशिक रूप से आश्रित था। हालाँकि प्रबंधन की ओर से की गई विभिन्न पहलों और उपायों के कारण निम्से ने वर्ष 2001-02 में आत्मनिर्भरता हासिल की और आज भी उसी पथ पर अग्रसर है।

आत्मनिर्भरता बनायी रखने के लिए की गई पहलें

इस अवधि के दौरान कई नये कदम उठाये जाने के चलते संस्थान न केवल सतत तौर पर आत्मनिर्भर बना, बल्कि अधिक प्रभावी ढ़ंग से कार्य कर रहा है।

यह पहलें इस प्रकार हैं-
  बेहतर शैक्षणिक निष्पादन के लिए संकाय के साथ परिचर्चा के लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित करना। प्रस्तुतिकरण की शैली को गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ ही सामग्री को वर्तमान दौर के परिवर्तनों के साथ आद्यतन बनाना, ता कि उसे प्रतिभागियों को मुहैया की जाने वाली अध्ययन सामग्री में शामिल किया जा सके। संकाय और कर्मचारियों के विकास के लिए अवसर मुहैया करना।
  गत कई वर्षों से विकासशील देशों के प्रतिनिधियों के दौरों को प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए समझौतों तथा सहयोग के माध्यम से सफल बनाया जा रहा है साथ ही भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के को भी उभारा जा रहा है।

महत्व वाले क्षेत्र

औद्योगिकरण के माध्यम से आर्थिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य के क्रम में तथा उपलब्ध विशेषज्ञता तथा बाहरी स्रोतों से प्राप्त की जाने वाली विशेषज्ञों की सेवाओं के आधार पर संस्थान ने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की है जिन पर ज़ोर दिया जा सकता है तथा उनका दोहन किया जा सकता है।

ये क्षेत्र हैं –
उद्यमिता अनुसंधान
महिला उद्यमिता
प्रौद्योगिकी उन्नयन एवं हस्तांतरण
नीतिगत मामले
गैर सरकारी संगठनों का आपसी सम्पर्क
पर्यावरणीय मामले
क्लस्टर विकास
प्रबंधन परामर्श
गुणवत्ता प्रबंधन सेवाएं
वित्तीय सेवाएं
सूचना सेवाएं

औद्योगिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए संस्थान प्रशासनिक एवं नीतिगत मामलों की विकास अभिमुख समग्र व्यवस्था अपनायी है और विशेषकर मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्यमियों के सहयोग के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आरंभ की हैं। संस्थान के माध्यम से विभिन्न मद्दों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है -
• प्रशिक्षण
• अनुसंधान
• परामर्श
• सूचना सेवा और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं

कार्यक्रम के प्रकार और अन्य सेवाएं

घोषित राष्ट्रीय कार्यक्रम

देश के साथ-साथ अन्य विकासशील देशों में सूलम उद्यमियों के विकास के लिए निम्समे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है। उपभोक्ता संगठन की विभिन्न आवश्यकता के अनुरूप ही विभिन्न वर्गों में एक सप्ताह से 10 सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से चलाये जाते हैं।

प्रायोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम

उपभोक्ता संगठनों के आग्रह पर भी आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। कार्यक्रम संस्थान परिसर अथवा परिसर से बाहर भी आयोजित किये जाते हैं।

बाह्य केंद्र कार्यक्रम

उद्यमियों / उद्योजकों को विभिन्न जिलों/ राज्य या अन्य संगठनों के लघु उद्योग संघों के आग्रह पर उद्यमियों / उद्योगपतियों के लिए परिसर से बाहर भी कार्यक्रम चलाये जाते हैं।

सम्मेलन और कार्यशालाएं

सरकारी नीतियों के अनुसार सूलम उद्यम क्षेत्र के लिए विभिन्न विषयों पर सम्मेलनों और कार्यशालाओं का आयोजन संस्थान परिसर में किया जाता है।

घोषित और प्रायोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम

विकासशील देशों की आवश्यकतानुसार दीर्घ अवधि के पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं। सीएफटीसी, एमईए, आईएलओ, यूनिडो जैसी प्रायोजित संगठनों के आग्रह पर उनके हिसाब से कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

शैक्षिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी कार्यक्रम

उपभोक्ता संगठनों में सेवारत कार्यकारियों के लिए एक वर्ष के स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम (अंश कालिक) चलाये जाते हैं। शिक्षित बेरोज़गार युवाओं के लिए सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं। प्रायोजित संगठनों के कर्मचारियों / कार्यकारियों के लाभ के लिए भी आईटी पाठ्यक्रम चलाये जाते हैं।

परामर्श एवं अनुसंधानम परियोजनाएँ

निम्सेके पास अनुसंधान अध्ययन करने का काफी गहरा अनुभव है और उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया जाता है। सूक्ष्म और सूक्ष्म अवधारणा वाले लघु उद्योग प्रबंधन, विस्तारीकरण, विकास और उन्नयन जैसी विविधा से निपटने के लिए अब तक कई शोध अध्ययन किये गये। आकलन, मूल्यांकन, प्रभावी, समस्या, उपचार, पहचान और समस्या समाधानों की पहुँच, व्यवहारिक अवधारणा, विपणन और विभिन्न प्रबंधकीय अवधारणा, आधुनिकीकरण, तकनीक स्थानांतरण आदि से संबंधित विभिन्न अध्ययनों का गहन दीर्घकालीक अनुभव होने के कारण निम्से अपने उपभोक्ता के शोध गतिविधियों में लगातार सेवा प्रदान करता है।

सूचना और पुस्तकालय सेवाएं

निम्समे के लघु उद्यमी राष्ट्रीय प्रलेखन केन्द्र (सेन्डॉक) को मज़बूत बनाया गया है, ताकि मूल्यवान सूलम उद्यमियों को घरेलु तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की संभावनाओं, व्यापार की जानकारी, विनियमक प्रणाली आदि के बारे में समेकित सामग्री उपलब्ध की जा सके। इस प्रकार के डाटा बेस सेवा देश के लघु उद्योग संघों को ऑनलाइन उपलब्ध करवा रहा है। पुस्तकालय विज्ञान का उपयोग कार्य दिवस के साथ-साथ कार्यालय के दौरान और उसके बाद भी कई सदस्यों द्वारा उपयोग किया जाता है।

प्रकाशनें

शैक्षणिक गतिविधियों के अंतर्गत निम्समे कई पत्रिकाओं तथा पुस्तकों का प्रकाशन करता है। सेडमे की एक प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका, एसएमई तकनीक, एसएमई नीति व अन्य जरनल आदि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में काफी सराहनीय कार्य करते हैं।