उद्गम

 

संस्थान की शुरुआत वर्ष 1960 में केंद्रीय औद्योगिक विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (सीआईईटीआई) के रूप में नई दिल्ली में उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत एक विभाग के रूप में हुई। बाद प्रशासनिक तौर पर अधिक स्वायत्तता प्रदान करने और छोटे और मध्यम उद्यमों के संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से इसका नामकरन लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईटी) के रूप में करते हुए इसे वर्ष 1962 में मुख्यालय के रूप में हैदराबाद में स्थानांतरित कर दिया गया।

लघु और मध्यम उद्यमों के संवर्धन तथा विस्तार में संस्थान द्वारा निभाई जा रही भूमिका को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र उद्योग विकास संगठन (यूनिडो) ने अपनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस योजना के अंतर्गत सिएट के उत्कृष्टता के केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सलेंस) के रूप में स्वीकृति प्रदान की। संस्थान को मिली इस उपलब्धि को देखते हुए भरत सरकार ने वर्ष 1984 में इसे राष्ट्रीय दर्जा प्रदान करते हुइ इसका नामकरन राष्ट्रीय लघु उद्योग विस्तार एवं प्रसिक्षण संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्मॉल इंडस्ट्रीज एक्सटेंशन एण्ड ट्रेनिंग (निसिएट)) कर दिया।

संस्थान ने काफी कम अवधि में उद्यमिता विस्तार के बारे में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली। वर्ष 2006 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (एमएसएमई-डी) 2006 अस्तित्व में आने के साथ संस्थान को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत तैयार किये गये सर्व समावेशी विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संस्थान का नाम राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) कर दिया गया।

उत्कृष्टता के केन्द्र
भारत सरकार द्वारा सिएट को मुख्य रूप से व्यवसाय के अनुकूल माहौल बनाने के माध्यम से लघु उद्योगों के संवर्धन में सहायता करने की जिम्मेदारी के साथ राष्ट्रीय संस्थान का प्रदान किया था। वर्ष 1984 में यूनिडो ने इसके केंद्रों के माध्यम से किये गये प्रयासों को देखते हुए अपने उत्कृष्टता के केंद्र योजना के अंतर्गत इसे स्वीकृति प्रदान की। इसी वर्ष भारत सरकार द्वारा इसे दिये गये राष्ट्रीय दर्जे के बाद इसका नामकरन निसिएट किया गया। तब से इस संस्थान ने उद्यमिता संवर्धन और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति पाने की दिशा में एक लम्बा सफर तय किया है। वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2006 में संसद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास विधेयक पारित किया, जिसे 2 अक्तूबर 2006 से प्रभाव में लाया गया। तदनुसार, निर्धारित विस्तारित लक्ष्य और उद्देश्यों को प्रतिबिंबित करने के लिए 11 अप्रैल 2007 को संस्थान का भी नाम राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) के रूप में विस्तारित किया गया और संस्थान के संगठन के साथ संचरना का भी पुनर्निर्धारण किया गया। यह संस्थान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (विगत लघु उद्योग और कृषि एआरआई मंत्रालय), भारत सरकार का एक संगठन है। निम्समे (विगत सिएट के रूप में) 1 जुलाई 1962 से प्रभावी 1350 फ़ासली के अनुसार सार्वजनिक संस्था पंजीकरण अधिनियम के तहत हैदराबाद, आंध्र प्रदेश में पंजीकृत है।

संस्थान का प्रशासन

संस्थान की गतिविधियों का प्रबंधन, प्रशासन, निर्देशन और नियंत्रण भारत सरकार द्वारा संस्थान के नियम और नियम, नियमों और विनियमों के नियम 22 (ए और बी) के अनुसार भारत सरकार द्वारा गठित गवर्निंग काउंसिल द्वारा प्रबंधित, प्रशासित, निर्देशित और नियंत्रित किए जाते हैं। संस्था का गठन भारत सरकार द्वारा नियमों और अधिनियमों के अंतर्गत नियम क्र. 3 के अनुसार किया गया है।

मा. केंद्रीय मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार संस्थान के संस्था प्रमुख और शासी परिषद के अध्यक्ष हैं। डॉ. गुरुप्रसाद मोहपात्रा, आईएएस, सचिव, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, सरकार संस्था के उपाध्यक्ष, शासी परिषद के उपाध्यक्ष और कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं। सुश्री अलका नांगिया अरोड़ा, आईडीएएस, संयुक्त सचिव, भारत सरकार संस्था की शासी परिषद की उपाध्यक्ष तथा कार्यकारी समिति की अध्यक्ष हैं और सुश्री एस. ग्लोरी स्वरूपा संस्थान की महानिदेशक हैं।

उत्कृष्ट अनुसंधान और परामर्श अध्ययन

*राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान (निम्समे) में कई उत्कृष्ट अनुसंधान/ परामर्श अध्ययन शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

*पोचमपाड क्षेत्र का विकास (1972)।

विदर्भ क्षेत्र (1973) में विकास केंद्रों की पहचान।

*देश में विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग अनुकूल संभावनाओं अध्ययन (1974 से)।

*प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं जैसे कि टीवाईआरएसईएम, ड्वाक्रा, पीएमआरवाई, एसईईयूवी, सीएमईवाई, आदरना, आईआईडी, स्वसहायता समूह, डीडब्ल्यूसी, विकास आयुक्त (हैंडलूम), विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और एनबीसीएफडीसा पर प्रभाव / मूल्यांकन अध्ययन।

*नीति अनुसंधान अध्ययन (1978 से)।

*बीमार इकाइयों और केस स्टडी के निदान के लिए चेक-लिस्ट तैयार करना (1981 से)।

*जिला विकास और क्षेत्रीय योजना अध्ययन।

*अरुणाचल प्रदेश के वस्त्र और हस्तशिल्प क्षेत्र में तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन (2001)।

*पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशिष्ट संसाधन आधार के लिए परियोजनाओं की पहचान के बारे में अध्ययन (2003)।

*मॉरीशस में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विज़न डॉक्यूमेंट (2003)।

*मॉरीशस के लिए लघु और मध्यम उद्यमों के बारे में परियोजना प्रोफाइल (2004)।

*लघु और मध्यम उद्यमों के लिए सूचनाओं की आवश्यकता (2005)।

*सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के कार्यान्वयन संबंधी सहायता-सलाह, निगरानी, कार्यान्वयन (2004-07)।

*पारम्परिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए निधि योजना (स्फूर्ति), हथकरघा और हस्तशिल्प क्लस्टरों के बारे में सहायता-सलाह (2006)।

*तमिलनाडु राज्य में राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) के माध्यम से संचालित की जा रही योजनाओं का मूल्यांकन अध्ययन (2008)

*केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी, गोवा और केरल में योजनाओं राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) का मूल्यांकन (2009-10)

*विशाखापट्टनम जिले में राजीव विद्या मिशन, आंध्र प्रदेश के अन्तर्गत भगवतुला चैरिटेबल ट्रस्ट (बीसीटी) द्वारा स्कूलों के संचालन संबंधी अभिनव और प्रयोगात्मक कार्यक्रम की कार्यपद्धति का मूल्यांकन (2009-10)।

*विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के कार्यालय द्वारा प्रायोजित आम्बेडकर हस्तशिल्प विकास योजना (एएचवीवाई) के तहत योजनाओं के कार्यान्वयन में अधिक प्रभावशीलता लाने के बारे में मूल्यांकन अध्ययन (2009-10)।

*आवास निर्माण और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, भारत सरकार के लिए प्रशिक्षण सामग्री (मॉड्यूल) की तैयारी (2009-10)

*आवास निर्माण और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय, सरकार द्वारा अनुसंधान अध्ययन प्रायोजित। भारत का (2009-10)

*हस्तकला में पारम्परिक पेंटिंगों के लिए संसाधन केंद्र (2010-11)

*आंध्र प्रदेश में 37 क्लस्टरों और केरल में 24 क्लस्टरों के लिए संसाधन-सह-निगरानी एजेंसी (2010-11)

*विकास आयुक्त (सू.ल.म. उद्यम) द्वारा प्रायोजित निर्यात संवर्धन (निर्यात के लिए पैकेजिंग के बारे में प्रशिक्षण कार्यक्रम)

*योजना का मूल्यांकन "निर्यात संवर्धन (निर्यात के लिए पैकेजिंग के बारे में प्रशिक्षण कार्यक्रम)" (2013-14) ।

*भारत में व्यवसाय सदस्यता संगठनों (बीएमओ) के लिए क्षमता का विकास – गिझ (जीआईजेड) के एमएसएमई अम्ब्रेला कार्याक्रम का हिस्सा (2013-14)।

*विकास आयुक्त (हथकरघा) द्वारा प्रायोजित पोचमपल्ली हैण्डलूम सेंटर का मूल्यांकन (2013-14)।

*सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग, ओडीशा सरकार द्वारा जिला उद्योग केंद्रों के किये गये पुर्गठन और पुनर्रचना मूल्यांकन (2014-15)।

*राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) द्वारा कार्पोरेट सोशियल रिस्पांसिबिलिटी के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में चिरकालिक आय सृजन के लिए आयोजित कौशल विकास कार्यक्रम का आधारभूत सर्वेक्षण (2014-15)।

*असम, केरल, लक्षदीप और तेलंगाना राज्यों में वित्तपोषित प्रधानमंत्री रोज़गार गारंटी कार्यक्रम (पीएमईजीपी) इकाइयों का 100% भौतिक सत्यापन (2014-16)।

*ओडिशा राज्य में जिला उद्योग केंद्रों और क्षेत्रीय उद्योग केंद्रों पुनर्नवीनीकरन पर अध्ययन (2014-16)।

*आंध्र प्रदेश कॉमन एंट्रेस टेस्ट के लिए वेब आधारित सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्टूडेंट ट्रैकिंग सिस्टम के विकास की परियोजना (2015-16)।

*राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के लिए कर्मचारी संतुष्टि और संगठनात्मक माहौल का अध्ययन (2015-16)।

*गद्वाल हथकरघा पार्क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने का कार्य (2015-16)।

*खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के केआरडीपी क्लस्टर कार्यक्रम के अन्तर्गत गोंदिया, नागपुर जिलों के मुरमुरा क्लस्टरों का नैदानिक अध्ययन (2015-16) ।

*हरिहर खादी क्लस्टर, दावणगेरे (कर्नाटक), मोत्कूर इकत हथकरघा बुनाई क्लस्टर, नलगोंडा (तेलंगाना), पेडाना कलामकारी ब्लॉक प्रिंटिंग क्लस्टर, पेडाना (आंध्र प्रदेश), कोंडापल्ली वुड क्राफ्ट क्लस्टर, विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश), पेम्बर्ती मेटलवेयर क्लस्टर, वरंगल (तेलंगाना), और लीज़ा गद्वाल सिल्क क्लस्टर, महबूबनगर (तेलंगाना) के लिए सॉफ्ट इंटरवेंशन (2015-16)।

*हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त और विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) की प्रशिक्षण योजनाओं का मूल्यांकन अध्ययन (2015-16)।

अग्रगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम -

राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान ने विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में अपनी तरह के एकमात्र कार्यक्रम हैं। इनमें से कुछ निम्न प्रकार हैं -

प्रबंधन विकास कार्यक्रम -

*क्षेत्र विकास संबंधी कार्यक्रम।

*व्यवहार्यता सर्वेक्षण और विश्लेषण संबंधी कार्यक्रम।

*औद्योगिक संपदा संबंधी कार्यक्रम।

*युवा अभियंताओं और तकनीकीतंत्रियों (टेक्नोक्रैट) के लिए कार्यक्रम।

*आईएएस/ आईईएस अधिकारियों के लिए लघु उद्योग विकास के माध्यम से अभिविन्यास पर ऊर्ध्वाधर एकीकृत (वर्टिकली इंटीग्रेटेड) पाठ्यक्रम।

*राज्य और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के योग्य कर्मचारियों के लिए प्रभावी विकास कार्यक्रम।

*अंतर्राष्ट्रीय अधिकारियों के लिए विभिन्न विषयों के बारे में नियमित आधार पर विशेष कार्यक्रम।

*श्रीलंकाई प्रशासनिक अधिकारियों के लिए उद्यम विकास और सरकारी प्रभावशीलता (ईडीजीई) कार्यक्रम।

*उत्पादन योजना और नियंत्रण में संवेदनशीलता पर प्रशिक्षण।

*संकाय विकास कार्यक्रम।

*क्लस्टर विकास पर कार्यक्रम।

*उत्तर पूर्व के अधिकारियों के लिए विभिन्न केंद्रित विषयों पर कार्यक्रम।

उपलब्धियों का विस्तार

*के साथ सहयोग में उपलब्धि प्रेरणा में एक अग्रणी शोध अध्ययन आयोजित किया। डेविड मैक्लैंड की काकीनाडा प्रयोग (1964)

*भारत में पहली कार्यकारी प्रयोगशाला का आयोजन (1964)।

*लघु और मध्यम उद्यम विकास के बारे में पहले अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन (1967)।

*भारतीय उद्योग क्षेत्र में उपयुक्त तकनीकों की अवधारणा के विकास का कार्य (1969)।

*लघु उद्यम राष्ट्रीय प्रलेखन केंद्र (सेन्डॉक) नामक एक विशेष सूचना केंद्र की की स्थापना (1971) ।

*लघु उद्योग विकास संगठन (सिडो) की स्थापना में तंजानिया सरकार की सहायता की गई (1974)।

*गुवाहाटी में एक क्षेत्रीय शाखा केंद्र की स्थापना की (1979)।

*राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त किया और राष्ट्रीय लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (निसिएट) का नाम दिया (1984)।

*विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी उद्यमशीलता के बारे में केस स्टडीज और वीडियो वृत्तचित्रों का निर्माण कार्य (1986)।

*लघु उद्योग प्रबंधन संबंधी अनुरूपता प्रयास (सिमसिम) के लिए पहला कम्प्यूटरीकृत सॉफ्टवेयर पैकेज विकसित किया गया (1987)।

*परियोजना आकलन और मूल्यांकन (1996)।

*संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता (1997)।

*संस्थान को स्वावलंबी दर्जा प्राप्त हुआ (2001-02)।

*युगांडा, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, नाइजीरिया, सूडान, कैमरून और घाना के साथ क्रेता से क्रेता (बी-टू-बी) लेन-देन।

*नई दिल्ली में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्लस्टर विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला (2008) में आयोजित की गई।

*बैंक ऑफ घाना के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम (2006-08)।

*सार्वकालिक रिकार्ड के रूप में 28 अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी विकास कार्यक्रमों का आयोजन किया गया,जिनमें से 5 खास तौर पर अफ्रीकी देशों के लिए आयोजित किये गये (2007-08)।

*भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन की अफ्रीकी महिला अधिकारियों के लिए अग्रदूत के रूप में आउटरीच कार्यक्रम (2007-08)।

*बांग्लादेश लघु और कुटीर उद्योग निगम (बीएससीआईसी) के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम (2008-09)।

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*संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूनेस्को)

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*बैंक ऑफ घाना, एआरबी एपेक्स

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*खादी एवं ग्रामोद्योग विकास आयोग (केवीआईसी)

*कयर बोर्ड

*राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम

*भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय

*सार्वजनिक उद्यम विभाग

*पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय

*पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास विभाग

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*कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय

*कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग

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*विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग

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*स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना (एसजेएसआरवाई)

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*राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएफसीएसडीसी)

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*महिला और बाल विकास विभाग

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*योजना आयोग

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*ओजोन प्रकोष्ठ

*सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

*सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना