संतुलन एवं विस्तार औद्योगिकता के दो महत्वपूर्ण पहलु हैं। इन दो पहलुओं की अनदेखी के कारण क्षेत्रीय असंतुलन तथा ग्रामीण एवं शहरी गरीबी बड़े पैमाने पर उभरकर सामने आयी। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र में लगातार अनुसंधान कार्य चलाये जा रहे हैं। केन्द्र का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक परिदृष्य में एकीकृत नियोजन के माध्यम से लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केन्द्र की ओर से उद्यमिता विकास कार्यक्रम के संवर्धन पर खासा ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें आय उत्पादन, मूलभूत ढाँचा तथा पर्यावरण प्रबन्धन भी खास तौर पर शामिल है। इसके अलावा केन्द्र की गतिविधियों में कार्यक्रम मूल्यांकन, अनुसंधान योजनाओं का संचालन, व्यवहार साध्यता अध्ययन, संभाव्य साधन परीक्षण, केन्द्रीय एवं राज्य सरकारों के लिए कार्यक्रमों का संचालन एवं परियोजना कार्यान्वयन, ग्रामीण उद्यमों का संवर्धन तथा मूलभूत सुविधाओं का विकास आदि शामिल है।