परिचय

बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) का उपयोग विश्वभर में प्रौद्योगिकीय प्रतिस्पर्धा के परिवेश में आर्थिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से व्यापार औजार के रूप में किया जा रहा है। इसके लिए हमारी अर्थव्यवस्था के भी दरवाज़े खोलते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भी बड़े अपतटीय उद्यमियों से मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं। भारत में लघु एवं मध्यम उद्यमों को बौद्धिक संपदा अधिकार को गंभीरता से लेना चाहिए, जो फिलहाल अपने ज्ञान को नवाचारों के माध्यम से संपत्ति में परिवर्तित करने की अपनी क्षमता से प्रति अनभिज्ञ हैं, जो उनका भविष्य निर्धारित कर सकती है। बौद्धिक संपदा का उत्पादन, मूल्यांकन, संवर्धन, तथा दोहन विश्वभर में लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए काफी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। नैपुण्य विकास की आवश्यकता, बौद्धिक संपदा के प्रबंधन के सामर्थ्य और भरत में उसके प्रभाव की शक्ति को ध्यान में रखते हुए हमने निसिएट में बौद्धिक संपदा अधिकारों के केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा। यह केंद्र विकसित और विकासशील देशों के लघु एवं मध्यम उद्यमों के बीच की दूरी पाटने का प्रयास कर रहा है।